कैप्टेन विक्रम बत्रा की जीवनी बायोग्राफी| Captain Vikram Batra Biography In Hindi

कैप्टेन विक्रम बत्रा की जीवनी : जन्म , परिवार और प्रारंभिक जीवन, शिक्षा, सैन्य करियर, परमवीर चक्र पुरस्कार, कारगिल युद्ध और और शहादत [ Vikram Batra Biography in Hindi, captain vikram batra ki kahani, Family ]

कैप्टेन विक्रम बत्रा की जीवनी : कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। 1999 में कारगिल युद्ध जो कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था के दौरान अभूतपूर्व वीरता और नेतृत्व क्षमता का परिचय देने के उपरांत वह शहीद हो गए थे। आज के इस पोस्ट में हम सेना में शेर शाह के नाम से प्रसिद्द कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रारंभिक जीवन, परिवार, शिक्षा, सैन्य करियर, पुरस्कार, कारगिल युद्ध इत्यादि के बारे विस्तार से बताने जा रहे हैं।

कैप्टेन विक्रम बत्रा अभी न्यूज़ में क्यों हैं

जल्द ही में सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी मूवी “शेरशाह” रिलीज़ होने वाली है। यह फिल्म 1999 कारगिल वॉर और कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित है और इस मूवी में कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार सिद्धार्थ मल्होत्रा ने किया है।

इससे पहले 2003 में आयी फिल्म एलओसी: कारगिल भी कारगिल वॉर पर आधारित थी और इसमें कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार अभिषेक बच्चन ने किया था।

विक्रम बत्रा का व्यक्तिगत परिचय और एजुकेशन  Vikram Batra Personal Life and Education

विक्रम बत्रा का जन्म पालमपुर निवासी जी.एल. बत्रा और कमलकांता बत्रा के घर 9 सितंबर 1974 को दो बेटियों के बाद दो जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। उनका नांम उनकी माता ने विक्रम और विशाल रखा। इनकी शिक्षा पहले डीएवी स्कूल, फिर बाद में सेंट्रल स्कूल पालमपुर से हुई।

सेना छावनी में स्कूल होने के कारण सेना के अनुशासन और देश प्रेम की भावना भी उनमें भर गयी साथ ही उनके पिता से देश प्रेम की कहानियां सुनने पर विक्रम में स्कूल के समय से ही देश प्रेम प्रबल हो उठा।

हालाँकि स्कूल में विक्रम शिक्षा के क्षेत्र में ही अव्वल नहीं रहे, बल्कि टेबल टेनिस में अव्वल दर्जे के खिलाड़ी होने के साथ उनमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।

10 +2 तक की पढ़ाई करने के बाद विक्रम पालमपुर से चंडीगढ़ चले गए और डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई शुरू कर दी। इस दौरान वह एनसीसी के सर्वश्रेष्ठ कैडेट चुने गए और उन्होंने गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया। उन्होंने सेना में जाने का पूरा मन बना लिया और सीडीएस (संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा) की भी तैयारी शुरू कर दी। हालांकि विक्रम को इस दौरान हांगकांग में मर्चेन्ट नेवी में भी नौकरी मिल रही थी जिसे इनके द्वारा ठुकरा दिया गया।

डिंपल चीमा जो विक्रम बत्रा की मंगेतर थी और कारगिल युद्ध में विक्रम बत्रा के शहीद होने के बाद भी उन्होंने किसी और से शादी नहीं की।

विक्रम बत्रा का जन्म एवं परिचय (Vikram Batra birth date, age father name )

पूरा नामकैप्टन विक्रम बत्रा
सेवाभारतीय थलसेना ( 1997–1999 )
उपाधिकैप्टन
यूनिट13 JAK RIF
सेवा संख्यांकIC-57556
निक नामशेरशाह, विक्रम बत्रा
युद्धकारगिल युद्ध (ऑपेरशन विजय)
पितागिरधारी लाल बत्रा 
मांकमलकांता बत्रा
भाई / बहनभाई विशाल और दो बहने
जन्मतिथि9 सितंबर 1974
जन्म स्थानपालमपुर
निधन के समय उम्र7 जुलाई 1999 (उम्र 24)
स्कूलडीएवी स्कूल, सेंट्रल स्कूल पालमपुर
कॉलेजडीएवी कॉलेज, चंडीगढ़
विकिपीडियाVikram Batra Wikipedia
vikram batra wife / girlfriendडिंपल चीमा जो विक्रम बत्रा की मंगेतर थी

विक्रम बत्रा का सेना में चयन और करियर  (Vikram Batra’s selection and career in the army )

1996 में विक्रम बत्रा का चयन सीडीएस में हो गया और इसके जरिये उन्हें भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में प्रवेश मिला। और दिसंबर 1997 में करीब एक वर्ष के प्रशिक्षण के समाप्त होने पर उन्हें 6 दिसम्बर 1997 को जम्मू के सोपोर नामक स्थान पर सेना की 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली।

1999 में कैप्टेन विक्रम बत्रा ने कमांडो ट्रेनिंग के साथ और भी कई प्रशिक्षण । पहली जून 1999 को उनकी टुकड़ी को कारगिल युद्ध में भेजा गया। हम्प व राकी नाब स्थानों को जीतने के बाद विक्रम को कैप्टन बना दिया गया। “या तो बर्फीली चोटी पर तिरंगा लहराकर आऊंगा नहीं तो उसी तिरंगे में लिपटकर आऊंगा पर आऊंगा जरुर” – परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा ( 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ) के ये शब्द उनके देशप्रेम और आत्मविश्वास दिखाते हैं।

शेरशाह या कारगिल का शेर की उपाधि

इसके बाद श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने की ज़िम्मेदारी कैप्टन बत्रा की टुकड़ी को मिली। कैप्टन बत्रा अपनी कंपनी के साथ घूमकर पूर्व दिशा की ओर से इस क्षेत्र की तरफ बडे़ और बिना शत्रु को भनक लगे अपनी कंपनी को दुश्मन के ठिकानों पर सीधे आक्रमण के लिए प्रेरित किया।

सबसे आगे रहकर दस्ते का नेतृत्व करते हुए उन्होनें बड़ी निडरता से शत्रु पर धावा बोल दिया और उनमें से चार को मार डाला। और अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को अपने कब्ज़े में ले लिया।

कैप्टन विक्रम बत्रा ने इस चोटी पर विजय के बाद रेडियो के जरिये अपने सन्देश में ‘यह दिल मांगे मोर’ कहा तो सेना ही नहीं बल्कि पूरे भारत में उनका नाम छा गया। इसी दौरान विक्रम के कोड नाम शेरशाह के साथ ही उन्हें ‘कारगिल का शेर’ की भी संज्ञा दे दी गई। अगले दिन चोटी 5140 में भारतीय झंडे के साथ विक्रम बत्रा और उनकी टीम का फोटो मीडिया में छा गयी।

कारगिल के शेर की वीरगति

इसके बाद सेना ने चोटी 4875 को भी कब्ज़े में लेने का अभियान के लिए भी कैप्टन विक्रम और उनकी टुकड़ी को जिम्मेदारी दी गयी। उन्हें और उनकी टुकड़ी एक ऐसी संकरी चोटी से दुश्मन के सफ़ाए का कार्य सौंपा गया जिसके दोनों ओर खड़ी ढलान थी और इस कार्यवाई को शीग्र पूरा करने के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा ने एक संर्कीण पठार के पास से शत्रु ठिकानों पर आक्रमण करने का निर्णय लिया।

आक्रमण का नेतृत्व करते हुए आमने-सामने की भीषण लड़ाई में पांच शत्रु सैनिकों को मार गिराया। दुश्मन की भारी गोलीबारी के सम्मुख एक लगभग असंभव सैन्य कार्य को पूरा कर दिखाया। उन्होंने जान की परवाह न करते हुए अपने साथियों के साथ, कई पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। किंतु ज़ख्मों के कारण यह खुद भी वीरगति को प्राप्त हुए। उनके इस असाधारण नेतृत्व से प्रेरित उनके साथी जवान प्रतिशोध लेने के लिए शत्रु पर टूट पड़े और शत्रु का सफ़ाया करते हुए प्वॉइंट 4875 पर कब्ज़ा कर लिया।

विक्रम बत्रा के पुरस्कार और सम्मान Vikram Batra’s Awards and Prize List in Hindi

1999 : मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र

FAQ –

Q – विक्रम बत्रा की पत्नी कौन हैं?

Ans – कैप्टन विक्रम बत्रा की मंगेतर का नाम डिंपल चीमा है, जिन्होंने कारगिल युद्ध में विक्रम बत्रा के शहीद होने के बाद अविवाहित रहने का फैसला किया। विक्रम बत्रा की जीवनी पर बनने वाली फिल्म शेरशाह में विक्रम बत्रा की मंगेतर का किरदार काइरा अडवाणी निभा रही हैं।

Q – कैप्टन विक्रम बत्रा का निक नाम क्या था?

Ans – कैप्टन बत्रा को उनकी असाधारण बहादुरी और नेतृत्व क्षमता के लिए “शेर शाह” (शेर राजा) के नाम से जाना जाता था।

Q – भारत में सबसे बहादुर आदमी कौन है?

विक्रम बत्रा को मरणोपरांत भारत की स्वतंत्रता की 52वीं वर्षगांठ पर 15 अगस्त 1999 को भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

Q – कैप्टन विक्रम बत्रा की मृत्यु कहाँ हुई थी?

Ans – कारगिल [7 जुलाई 1999]

Q – कैप्टन विक्रम बत्रा की सक्सेस सिग्नल क्या था?

Ans – जब जून 1999 में कैप्टन विक्रम बत्रा ने कारगिल में युद्ध के मैदान से ‘ये दिल मांगे मोर’ सक्सेस सिग्नल इस्तेमाल किया, तो इसका सिर्फ एक ही मतलब था कि उन्होंने और उनकी टीम ने अपना मिशन यानि Point 5140 पर जीत हासिल कर ली।

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